“पुस्तकें पारस पत्थर होती हैं। अपने ज्ञान के स्पर्श से वे इंसान को सोना ही नहीं बल्कि दूसरा पारस पत्थर बना देती है।”

 महाविद्यालय में एक समृद्ध पुस्तकालय हैं । वर्तमान में 15500 (पंद्रह हजार पांच सौ) से अधिक पुस्तके स्नातक की है। ग्रंथालय में समाचार पत्र एवं पत्रिकाएं भी मंगाये जाते है। अनुसूचित जाति, जनजाति के छात्र छात्राओं के लिये नि:शुल्क पुस्तकें, प्रदान करने की बुक - बैंक योजना कार्यान्वित की जाती है। जिसके अंतर्गत अनुसूचित जाति / जनजाति के छात्र/छात्राओं को सत्रांत तक पुस्तकें नि:शुल्क प्रदान की जाती है। जिन्हें परीक्षा उपरांत वापस लिया जाता है।